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एक नई पहचान

आपको पता है ये चार लोग अर्जुन के साथ ही गीता (Geeta) का उपदेश सुन रहे थे

temple hanuman

भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध के लिए तैयार करने के लिए गीता का महान उपदेश दिया. गीता उपदेश महाभारत की एक महत्वपूर्ण घटना है. इसमें उन्होंने अर्जुन के माध्यम से समस्त प्राणियों को संदेश दिया. और अर्जुन को अपना विश्वरूप भी दिखाया. लेकिन आपको पता है ये चार लोग अर्जुन के साथ ही गीता (Geeta) का उपदेश सुन रहे थे. पौराणिक कथा के अनुसार ये थे हनुमान जी, धृतराष्ट्र, संजय और बर्बरीक.


1. पवन पुत्र हनुमान

जब गीता का उपदेश चल रहा उस दौरान पवन पुत्र हनुमान अर्जुन के रथ पर बैठे थे. उन्होंने भीम से वादा किया था कि वो महाभारत में उनकी तरफ रहेंगे. लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से. इसलिए अर्जुन के रथ के झंडे पर विराजमान थे.


2. धृतराष्ट्र

धृतराष्ट्र को भगवान कृष्ण ने वरदान दिया था कि संजय के माध्यम से आप भी महाभारत का युद्ध देख सकेंगे. इसलिए इन्होंने गीता उपदेश भी सुना था.
3. संजयमहर्षि व्यास के शिष्य तथा धृतराष्ट्र की राजसभा के सम्मानित सदस्य संजय को भी ये सौभाग्य प्राप्त था. धृतराष्ट्र को आँखों देखा हाल बताने का वरदान मिला था इन्हें. इन्होंने ही धृतराष्ट्र को पुरे महाभारत का लाइव कवरेज दिया था.


4. बर्बरीक

बर्बरीक घटोत्कच और अहिलावती के पुत्र तथा भीम के पोते थे. जब महाभारत का युद्ध चल रहा था उस दौरान उन्हें भगवान श्री कृष्ण से वरदान प्राप्त था कि कौरवों और पाण्डवों के इस भयंकर युद्ध को देख सकते हैं.

दसवें अध्याय के सातवें श्लोक तक भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी विभूति, योगशक्ति तथा उसे जानने के माहात्म्य का संक्षेप में वर्णन किया है. फिर ग्यारहवें श्लोक तक भक्तियोग तथा उसका फल बताया. अपनी दिव्य विभूतियों के बारे में बताने के बाद आखिर में श्री कृष्ण ने योगशक्ति का प्रभाव बताया और समस्त ब्रह्मांड को अपने एक अंश से धारण किया हुआ बताकर अध्याय समाप्त किया. यह सुनकर अर्जुन के मन में उस महान स्वरूप को प्रत्यक्ष देखने की इच्छा हुई. तब ग्यारहवें अध्याय के आरम्भ में भगवान श्री कृष्ण ने विश्वरूप के दर्शन के रूप में अपने को प्रत्यक्ष किया. इसी विराट स्वरूप में समस्त ब्रह्मांड को समाहित देख अर्जुन मोह मुक्त हुए तथा युद्ध के विरक्ति भाव से मुक्त होकर महाभारत युद्ध का निष्ठापूर्वक संचालन कर कौरवों पर विजय प्राप्त की.